50-60 साल से कारोबार कर रहे दुकानदारों ने फ्री-होल्ड की मांग उठाई, डीएम, कमिश्नर और नगर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
मेरठ। हापुड़ अड्डा चौराहे स्थित भगत सिंह मार्केट की दुकानों को फ्री-होल्ड कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। दशकों से यहां कारोबार कर रहे व्यापारियों ने दुकानों पर मालिकाना हक देने की मांग उठाते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया है। व्यापारियों ने डीएम, कमिश्नर और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर दुकानों की स्थिति की जांच कराने और मूल आवंटियों को स्वामित्व अधिकार देने की मांग की है।
व्यापारियों के मुताबिक, भगत सिंह मार्केट में करीब 193 दुकानें हैं, जहां दुकानदार पिछले पांच से छह दशकों से किराएदार के रूप में कारोबार कर रहे हैं। इन दुकानों से अनेक परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। ऐसे में दुकानदार चाहते हैं कि लंबे समय से चली आ रही किराएदारी की व्यवस्था पर विचार कर नियमानुसार दुकानों को फ्री-होल्ड करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर री-सर्वे, व्यापारियों की बढ़ी चिंता
बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जोन-ए में री-सर्वे की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी जद में भगत सिंह मार्केट भी आ रही है। इसी को देखते हुए व्यापारियों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी है। दुकानदारों का कहना है कि री-सर्वे के दौरान मार्केट से जुड़े भूमि अभिलेखों, आवंटन और किराएदारी के दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
राजस्व अभिलेखों में जमीन की स्थिति पर उठाए सवाल
व्यापारियों ने अपने ज्ञापन में बताया कि मार्केट की भूमि नजूल भूमि बताई जाती है, जबकि राजस्व अभिलेखों में जमीन का उल्लेख पटरी, सड़क और पुलिया के रूप में दर्ज होने की बात कही गई है। ऐसे में व्यापारियों ने संबंधित अभिलेखों की जांच कराकर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
दुकानों के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग
दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व और नजूल भूमि से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। इसके साथ ही नगर निगम से संबंधित दुकानों के आवंटन, किराएदारी, स्वामित्व और प्रबंधन के दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जाए, ताकि नियमों के अनुसार मामले का समाधान निकाला जा सके।
दशकों पुराने कारोबार पर टिकी हैं परिवारों की आजीविका
व्यापारियों का कहना है कि भगत सिंह मार्केट में कई पीढ़ियों से कारोबार संचालित हो रहा है। लंबे समय से दुकानें चला रहे व्यापारियों के लिए यह केवल व्यापार का स्थान नहीं, बल्कि परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है। ऐसे में उनकी मांग है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के रिकॉर्ड की जांच की जाए और पात्र दुकानदारों को नियमानुसार मालिकाना हक देने पर निर्णय लिया जाए।
अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर हैं। व्यापारियों की मांग पर संबंधित विभाग क्या रुख अपनाते हैं और री-सर्वे के दौरान मार्केट की भूमि व दुकानों के दस्तावेजों को लेकर क्या स्थिति सामने आती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।