भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से पहले सनातन परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र जल-घड़ों से विशेष स्नान कराया जाता है। इस अनुष्ठान को स्नान पूर्णिमा या सहस्त्रधारा स्नान कहा जाता है।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से पहले सनातन परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र जल-घड़ों से विशेष स्नान कराया जाता है। इस अनुष्ठान को स्नान पूर्णिमा या सहस्त्रधारा स्नान कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, 108 घड़ों के शीतल जल से स्नान करने के बाद तीनों देवता अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद वे 15 दिनों के लिए एकांतवास (अनवसर काल) में चले जाते हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और देवताओं की विशेष सेवा व विश्राम कराया जाता है।
मान्यता है कि विश्राम अवधि पूरी होने के बाद भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा में नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। यह परंपरा भगवान के मानवीय स्वरूप और भक्तों के साथ उनके भावनात्मक संबंध का प्रतीक मानी जाती है।