क्या करोड़ों की ताकत से सब कुछ मुमकिन? विजेंद्र हुड्डा को लेकर उठे बड़े सवाल घोटालों से लेकर मीडिया तक, आखिर कैसे बढ़ता गया विजेंद्र हुड्डा का प्रभाव? आरोपों के साये में नई पहचान, विजेंद्र हुड्डा को लेकर जनता पूछ रही सवाल क्या पैसा और पहुंच कानून से भी बड़ी है? विजेंद्र हुड्डा पर फिर गरमाई बहस
उत्तर प्रदेश में चर्चित बाइक घोटाले से लेकर मोनाड यूनिवर्सिटी की कथित फर्जी मार्कशीट प्रकरण तक, विजेंद्र हुड्डा का नाम कई विवादों में सामने आ चुका है। विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद भी उनका सार्वजनिक जीवन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
विजेंद्र हुड्डा बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर बिजनौर से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद अब उनके एक न्यूज चैनल के अध्यक्ष बनने को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।

सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों और विवादों के बाद भी क्या प्रभाव और आर्थिक ताकत के दम पर कोई व्यक्ति लगातार नए पद और पहचान हासिल कर सकता है?
जनता के बीच यह चर्चा भी है कि जिन मामलों में हजारों करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप लगे, उनकी पूरी सच्चाई और जवाबदेही आखिर कब सामने आएगी? क्या जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर पाएंगी या फिर बड़े नाम और बड़ा पैसा हर सवाल पर भारी पड़ता रहेगा?
फिलहाल इन मुद्दों पर बहस जारी है और लोगों की निगाहें संबंधित एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।