मेरठ। 1857 की क्रांति के नायक शहीद धनसिंह कोतवाल के बलिदान, साहस और राष्ट्रभक्ति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 30 अक्टूबर से 27 नवंबर 2026 तक देशव्यापी क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल जन्मोत्सव माह मनाया जाएगा। इसको लेकर शास्त्रीनगर स्थित 1857 के क्रांतिनायक शहीद धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान के कार्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल के प्रपौत्र तस्वीर सिंह चपराणा ने की।
देशभर में होंगे विभिन्न कार्यक्रम
प्रेसवार्ता में बताया गया कि जन्मोत्सव माह का शुभारंभ 30 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम से होगा। 27 नवंबर को जन्मोत्सव तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें खेलकूद एवं दौड़ प्रतियोगिताएं, वृक्षारोपण अभियान, विचार गोष्ठियां, जनजागरूकता रैलियां, दीपोत्सव तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां शामिल हैं।
संस्थान का उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को 1857 की क्रांति के इतिहास से परिचित कराना तथा क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल के योगदान को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना है।
सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें
शोध संस्थान ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. पाठ्यक्रम में शामिल हो जीवनी: धनसिंह कोतवाल की जीवनी और 1857 की क्रांति में उनके योगदान को यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
2. पुलिस मुख्यालय में लगे प्रतिमा: लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के सिग्नेचर भवन में क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल की प्रतिमा स्थापित की जाए।
3. प्रदेश के थानों में लगें चित्र: उत्तर प्रदेश के सभी पुलिस थानों में उनके चित्र लगाए जाएं, ताकि पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को उनके ऐतिहासिक योगदान की जानकारी मिल सके।
4. विद्यालयों में दी जाए जानकारी: प्रत्येक वर्ष 10 मई, 4 जुलाई और 27 नवंबर को विद्यालयों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को उनके जीवन, बलिदान और 1857 की क्रांति के बारे में बताया जाए।
इतिहास और विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की अपील
संस्थान ने सामाजिक संगठनों, खाप पंचायतों के मुखियाओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों, युवाओं और आम नागरिकों से जन्मोत्सव माह के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। आयोजकों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश दिया जाएगा।
प्रेसवार्ता में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर देवेश चंद्र शर्मा, निदेशक प्रदीप सिंह गुर्जर, प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश सिंह थामा, विनय कुमार, संजय धामा और राजेंद्र कश्यप सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।