मेरठ। बढ़ती एलपीजी कीमतों के बीच जहां आम लोग घरेलू गैस सिलेंडर लेने में परेशान हैं, वहीं सरकारी कार्य में घरेलू गैस सिलेंडर के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया है। मामला मेरठ के परतापुर रेलवे स्टेशन का है, जहां रेलवे से जुड़े एक ठेकेदार द्वारा सफेद पट्टी (लाइन मार्किंग) का कार्य कराया जा रहा था।
मेरठ। बढ़ती एलपीजी कीमतों के बीच जहां आम लोग घरेलू गैस सिलेंडर लेने में परेशान हैं, वहीं सरकारी कार्य में घरेलू गैस सिलेंडर के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया है। मामला मेरठ के परतापुर रेलवे स्टेशन का है, जहां रेलवे से जुड़े एक ठेकेदार द्वारा सफेद पट्टी (लाइन मार्किंग) का कार्य कराया जा रहा था।
मौके पर पहुंची मीडिया टीम ने देखा कि कार्य के दौरान घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा था। कर्मचारियों से इस संबंध में पूछताछ की गई, लेकिन वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
बताया गया कि मौके पर मौजूद वाहन पर NHAI का स्टीकर लगा था, जबकि वाहन रेलवे के ठेकेदार के कार्य में इस्तेमाल हो रहा था। फोन पर ठेकेदार ने दावा किया कि उनके घर पर घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध थे, इसलिए वही कार्यस्थल पर भेज दिए गए। मौके पर दो से अधिक घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल होते दिखाई दिए।

इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि रेलवे के कार्य में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया गया, तो क्या यह सुरक्षा मानकों और गैस उपयोग के नियमों के अनुरूप था? यदि कार्य के दौरान कोई हादसा हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
मामले में जब परतापुर थाना प्रभारी से जानकारी ली गई तो उन्होंने कथित तौर पर इसे अपने कार्यक्षेत्र का विषय नहीं बताया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन, गैस आपूर्ति विभाग और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि रेलवे प्रशासन, गैस आपूर्ति विभाग और संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करते हैं या नहीं।