Tuesday, October 13, 2026
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जिमखाना मैदान में गूंजा श्रीराम-सीता विवाह, जानकी विदाई ने नम कीं आंखें; कैकेयी के वरदान प्रसंग पर छाया सन्नाटा

✍️ Vipul Singhal 🗓️ 13 Oct 2026, 11:02 PM

अवध में युवराज राम के राजतिलक की तैयारियों से छाया हर्षोल्लास, मंथरा-कैकेयी संवाद ने बदली रामलीला की दिशा; 14 अक्टूबर को निकलेगी वनवास पदयात्रा

जिमखाना मैदान में गूंजा श्रीराम-सीता विवाह, जानकी विदाई ने नम कीं आंखें; कैकेयी के वरदान प्रसंग पर छाया सन्नाटा

मेरठ, 13 अक्टूबर 2026। मेरठ के बुढ़ाना गेट स्थित जिमखाना मैदान में मंगलवार को श्रीरामलीला का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह से लेकर जानकी विदाई, अवध में राजतिलक की तैयारियों, मंथरा-कैकेयी संवाद, राजा दशरथ-कैकेयी संवाद और वरदान प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विवाह के मंगलमय दृश्य ने श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी बिखेरी, वहीं जानकी विदाई के दौरान माहौल भावुक हो गया। कैकेयी द्वारा दो वरदान मांगने और भगवान श्रीराम के वनवास का प्रसंग सामने आते ही मैदान में सन्नाटा छा गया।

श्री सनातन धर्म रक्षिणी सभा, पंजीकृत मेरठ शहर के तत्वावधान में श्री रामलीला कमेटी, पंजीकृत मेरठ शहर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने रामायण के प्रसंगों का सजीव मंचन देखा। कलाकारों ने अपने अभिनय से त्रेतायुग की अयोध्या और मिथिला का दृश्य जीवंत कर दिया।

श्रीराम-जानकी विवाह ने बांधा समां

रामलीला की शुरुआत पूजा-अर्चना के साथ हुई। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की भव्य झांकी, सजी हुई मंच सज्जा, वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्पवर्षा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विवाह के मंगलमय दृश्य पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।

विवाह के बाद माता सीता की विदाई का प्रसंग मंचित किया गया। राजा जनक की भावुकता और पुत्री को विदा करने की पीड़ा ने दर्शकों को भावुक कर दिया। डोली विदाई के दृश्य ने पिता-पुत्री के रिश्ते की संवेदनशीलता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

युवराज राम के राजतिलक की तैयारियों से अवध में खुशी

अयोध्या लौटने के बाद राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ के सामने भगवान श्रीराम को युवराज बनाने की इच्छा व्यक्त की। राम के राजतिलक की तैयारियों से अवध में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। इस प्रसंग ने दर्शकों को आनंदित किया, लेकिन कहानी ने जल्द ही अप्रत्याशित मोड़ ले लिया।

मंथरा-कैकेयी संवाद ने बदली रामलीला की दिशा

मंथरा द्वारा कैकेयी को उकसाने और उनके मन में राजतिलक को लेकर संदेह पैदा करने का दृश्य प्रभावशाली रहा। मंथरा के संवादों के बाद कैकेयी के व्यवहार में आए बदलाव को कलाकारों ने जीवंत अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया।

इसके बाद कैकेयी के कोपभवन में जाने, राजा दशरथ के उन्हें मनाने और दो वरदान मांगने के प्रसंग का मंचन हुआ। कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। यह सुनकर राजा दशरथ की व्याकुलता और असहाय स्थिति देखकर दर्शक भावुक हो गए। पूरे मैदान में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया।

इस तरह रामलीला के मंचन में विवाह का उल्लास, विदाई की वेदना और वनवास प्रसंग की करुणा का सुंदर संगम देखने को मिला।

उद्घाटन, पूजन और आरती में शामिल हुए पदाधिकारी

कार्यक्रम का उद्घाटन अमित बंसल, ब्रह्मानंद, अशोक कुमार और पीयूष प्रकाश (अलंकार ज्वैलर्स) द्वारा किया गया। मुख्य पूजनकर्ता आलोक सर्राफ, रानू सत्संगी और अनिल बंसल रहे। प्रसाद सेवा सुभाष अग्रवाल सर्राफ द्वारा की गई।

भरत मिलाप समिति, शारदा रोड-ब्रह्मपुरी तथा राम बरात समिति की ओर से आरती संपन्न कराई गई। इस दौरान समितियों के प्रतिनिधियों का स्वागत और सम्मान भी किया गया। उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने पूजा-अर्चना के बाद रामलीला मंचन का शुभारंभ कराया।

14 अक्टूबर को निकलेगी वनवास पदयात्रा

संस्था अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने बताया कि बुधवार, 14 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे वनवास पदयात्रा सनातन धर्म मंदिर, बुढ़ाना गेट से प्रारंभ होगी। यात्रा कोतवाली, गुदड़ी बाजार, बजाजा, सर्राफा, वैली बाजार, लाला का बाजार, शीशमहल, सुभाष बाजार चौराहा, भटवाड़ा, नौगजा, शाहपीर गेट और सरस्वती मंदिर होते हुए सूरजकुंड स्थित केवट मंदिर पहुंचेगी। यहां भगवान श्रीराम के चरण पखारने की लीला का मंचन किया जाएगा।

इसके बाद शाम 8 बजे से जिमखाना मैदान में केवट लीला, श्रवण कुमार, दशरथ मरण, भरत-कैकेयी संवाद, चित्रकूट लीला और भरत शरणागति का मंचन होगा।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में संस्था अध्यक्ष मनोज गुप्ता (राधा गोविंद मंडप), महामंत्री मनोज अग्रवाल (खद्दर वाले), कोषाध्यक्ष योगेंद्र अग्रवाल बबलू, डॉ. आलोक गुप्ता (गुप्ता क्लासेज), राकेश गर्ग, रोहताश प्रजापति, राकेश शर्मा और विपुल सिंघल सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

रामलीला के इस मंचन ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक संबंधों, त्याग और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया।

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