मेरठ: वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के कोषाध्यक्ष के परिवार की 765 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे का आरोप
मेरठ। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम डिंढाला में वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के कोषाध्यक्ष वेदप्रकाश गुप्ता के परिवार की 765 वर्ग मीटर जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पीड़ित नितिन गुप्ता और गौरव गुप्ता का आरोप है कि वर्ष 2017-18 में बैनामे के जरिए खरीदी गई जमीन की पैमाइश और सीमांकन का मामला वर्षों से सरकारी दफ्तरों में लंबित है। परिवार का आरोप है कि पास में बनी फैक्ट्री की चारदीवारी में उनकी जमीन का हिस्सा शामिल कर लिया गया। न्याय नहीं मिलने पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने 26 अक्टूबर को कमिश्नरी पर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
बैजल भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के अध्यक्ष सत्य प्रकाश रस्तोगी ने बताया कि वेदप्रकाश गुप्ता के पुत्र नितिन और गौरव गुप्ता ने 14 दिसंबर 2017 और 19 अप्रैल 2018 को ग्राम डिंढाला में विभिन्न खसरा संख्याओं की भूमि बैनामे से खरीदी थी। पीड़ितों के अनुसार, संबंधित अभिलेखों में दोनों भाइयों के नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज हैं। दाखिल-खारिज के बाद जमीन की पैमाइश कराई गई तो आरोप है कि मौके पर 765 वर्ग मीटर भूमि कम मिली।
फैक्ट्री बनने के बाद बढ़ा विवाद
पीड़ितों का आरोप है कि वर्ष 2020 में नजदीक फैक्ट्री बनने के बाद जमीन को लेकर विवाद बढ़ गया। उनका दावा है कि फैक्ट्री स्वामी ने उनकी 765 वर्ग मीटर जमीन को चारदीवारी के भीतर शामिल कर लिया। परिवार का कहना है कि इस संबंध में राजस्व अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
अधिकारियों की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
पीड़ितों के अनुसार, उप जिलाधिकारी सदर की ओर से 7 जुलाई 2023 को अपर जिलाधिकारी प्रशासन को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया था कि पास में फैक्ट्री बनी होने के कारण मौके पर पैमाइश कराकर पूरा रकबा उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा है। पीड़ितों ने तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब भूमि की कमी का मामला सामने आ चुका है, तो सिजरा, नजरी नक्शे और फैक्ट्री के नक्शे का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है।
एसडीएम कोर्ट के आदेश को लेकर भी सवाल
परिवार ने धारा 24, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के अंतर्गत वाद संख्या T202111520108278 में 9 मार्च 2026 को पारित आदेश का हवाला दिया। पीड़ितों के मुताबिक, आदेश में राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए नवनिर्मित मेड़ों को कायम रखने का निर्देश दिया गया। उनका दावा है कि आदेश में 855 वर्ग मीटर के संदर्भ के बावजूद 765 वर्ग मीटर भूमि की कमी का उल्लेख है और मौके पर इस कमी को पूरा करना संभव नहीं बताया गया। इसी आधार पर परिवार ने सीमांकन की प्रक्रिया और आदेश के औचित्य पर सवाल उठाए हैं।
धारा 80 के इस्तेमाल पर भी आपत्ति
पीड़ितों ने 19 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि धारा 24 का मामला लंबित रहने के दौरान धारा 80 के तहत भूमि को अकृषिक घोषित करने की प्रक्रिया के जरिए कथित अतिक्रमण को वैध बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज रिपोर्टों को भी विरोधाभासी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
13 स्थानों पर भेजीं शिकायतें
परिवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मेरठ मंडल के आयुक्त, जिलाधिकारी मेरठ सहित विभिन्न अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायत भेजने की बात कही है। शिकायत में राजस्व निरीक्षक हरिदास सिंह और परगनाधिकारी राहुल द्विवेदी की रिपोर्टों पर भी आपत्ति जताई गई है। पीड़ितों ने संबंधित रिपोर्टों की जांच, कथित अतिक्रमण हटाकर 765 वर्ग मीटर भूमि कब्जामुक्त कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले में शीघ्र सुनवाई कर समाधान नहीं निकाला गया, तो 26 अक्टूबर को कमिश्नरी पर प्रदर्शन किया जाएगा।