लखनऊ में अवैध कोचिंग भवन में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वर्तमान में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) में तैनात अधिशासी अभियंता अनिल कुमार को निलंबित कर दिया है। निलंबन के आदेश के बाद मेडा प्रशासन ने उनसे सभी विभागों का प्रभार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।
जानकारी के अनुसार, अनिल कुमार दो वर्ष पहले लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में सहायक अभियंता के पद पर तैनात थे। जांच में सामने आया कि जिस भवन में आग लगी, उसे पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था, लेकिन उसके खिलाफ प्रभावी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की गई। प्राथमिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर शासन ने उनके निलंबन के आदेश जारी किए।

इस कार्रवाई के बाद मेरठ में भी अवैध निर्माण, फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर में कई ऐसे कॉम्प्लेक्स और व्यावसायिक भवन हैं, जिनको लेकर समय-समय पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मेरठ में भी भविष्य में लखनऊ जैसी कोई घटना होती है, तो क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? क्या अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर समय रहते सख्त कार्रवाई की जाएगी, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
फिलहाल शासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध निर्माण के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।