मेरठ। संयुक्त गुर्जर परिषद (मेरठ) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ललिता गौतम हत्याकांड सहित अन्य मामलों में निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। परिषद का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में न्याय तभी संभव है, जब दोषियों को सजा मिले और निर्दोषों को अनावश्यक कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
परिषद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। केवल आंदोलन में शामिल होने के आधार पर किसी व्यक्ति को गंभीर धाराओं में फंसाना उचित नहीं है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि जांच पूरी निष्पक्षता से कराई जाए और जिन लोगों की संलिप्तता साबित न हो, उन्हें तत्काल राहत दी जाए।
प्रेस विज्ञप्ति में गंगानगर क्षेत्र में मिठाई के वजन को लेकर हुए विवाद और उसके बाद सामने आए हिंसा के मामले की भी निंदा की गई है। परिषद ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इसके साथ ही संयुक्त गुर्जर परिषद ने भाजपा द्वारा प्रदेश संगठन में गुर्जर समाज को मंत्री एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे पद दिए जाने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि समाज की जनसंख्या और योगदान के अनुरूप अभी भी पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से गुर्जर समाज को मंत्रिमंडल, बोर्ड, आयोग, निगम तथा विभिन्न समितियों में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो नवंबर माह में प्रदेश स्तरीय चिंतन शिविर आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
संयुक्त गुर्जर परिषद ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य न्याय, सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा तथा समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से कार्य करना है।