Sunday, August 23, 2026
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डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी प्रकरण में संयुक्त गुर्जर परिसंघ का बड़ा ऐलान, न्यायिक जांच की मांग

✍️ Vipul Singhal 🗓️ 23 Aug 2026, 03:35 PM
डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी प्रकरण में संयुक्त गुर्जर परिसंघ का बड़ा ऐलान, न्यायिक जांच की मांग

मेरठ, 23 अगस्त। डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी मोहित जाटव के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट और अमानवीय प्रताड़ना के मामले में संयुक्त गुर्जर परिसंघ (मेरठ) ने कड़ा रुख अपनाया है। परिसंघ ने मामले को गंभीर बताते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

संयुक्त गुर्जर परिसंघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी के साथ 19 अगस्त 2026 को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर बर्बरता और ‘थर्ड डिग्री’ दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, डॉ. भाटी ने आरोप लगाया है कि उन्हें पुलिस अधिकारियों के कार्यालय में पीटा गया और गंभीर चोटें पहुंचाई गईं। वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से घटना को स्कूटी दुर्घटना से जोड़ने की बात कही गई है।

परिसंघ का कहना है कि दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविकता का पता केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से ही लगाया जा सकता है। संगठन ने सवाल उठाया कि जब आरोप पुलिस तंत्र पर ही हैं तो पुलिस द्वारा स्वयं जांच किया जाना निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप कैसे हो सकता है।

परिसंघ की प्रमुख मांगें

संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने मांग की है कि मामले की जांच किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश से कराई जाए। साथ ही एसएसपी कार्यालय और एसओजी कार्यालय से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सहित आवश्यक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और जांच प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित पुलिसकर्मियों को जांच पूरी होने तक जिम्मेदारियों से अलग किया जाए।

परिसंघ ने तत्कालीन/निवर्तमान SSP अविनाश पांडे, SHO अखिलेश गौड़ तथा मामले से जुड़े अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी उठाई है। इसके अलावा डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रशासनिक दबाव या उत्पीड़न वाली कार्रवाई नहीं किए जाने की मांग की गई है।

“न्याय से समझौता नहीं, अन्याय पर मौन नहीं”

प्रेस विज्ञप्ति में संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने कहा कि कानून और संविधान से ऊपर कोई नहीं है। संगठन ने स्पष्ट किया कि मामले में केवल आश्वासन या औपचारिक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस परिणाम चाहिए।

परिसंघ ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन व्यापक संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

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