नई दिल्ली। स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आंदोलन से संबंधित FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आंदोलन में शामिल रहे छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा, मारपीट या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों पर कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
सरकार ने कोर्ट के सामने रखा 2,873 लोगों का आंकड़ा
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 लोग भी मौके पर पहुंचे थे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों में से यदि किसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मारपीट या सार्वजनिक/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ संबंधित आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है।
अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए FIR को लेकर राहत दी। अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को ऐसे आदेश देने की शक्ति प्राप्त है, जो किसी मामले में “पूर्ण न्याय” करने के लिए आवश्यक हों।
हिंसा के मामलों पर अलग रुख
फैसले का मतलब यह नहीं माना जा रहा कि प्रदर्शन के दौरान किए गए हर कथित अपराध से स्वतः राहत मिल गई है। मारपीट, हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। हालांकि, फैसले की सटीक कानूनी सीमा संबंधित आदेश की शर्तों और प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगी।