श्री सनातन धर्म रक्षिणी सभा पंजीकृत मेरठ शहर के तत्वावधान में श्री रामलीला कमेटी पंजीकृत मेरठ शहर द्वारा शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को बुढ़ाना गेट स्थित जिमखाना मैदान में रामलीला मंचन का भव्य शुभारंभ किया गया। प्रथम दिन शिव विवाह, नारद मोह और रावण के अत्याचारों से जुड़ी लीलाओं का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति और आधुनिक लाइट-साउंड व्यवस्था ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन अजय गुप्ता (वासु ऑटो) और विकास चौबे ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद आरती, पूजन, गणेश वंदना और लक्ष्मी-नारायण पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्य पूजनकर्ता प्रवीण अग्रवाल (मोनी आटा चक्की) रहे। इस दौरान करीब 20 फीट की ऊंचाई पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा भगवान गणेश तथा उनकी पत्नियों रिद्धि-सिद्धि पर पुष्पवर्षा का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया गया।
शिव विवाह और नारद मोह की लीला ने मोहा मन
रामलीला का मंचन दिल्ली के रत्नाकर ड्रैमेटिक आर्ट प्रोडक्शन के प्रशिक्षित कलाकारों ने किया। सबसे पहले माता सती और भगवान शिव के प्रेम की कथा प्रस्तुत की गई। इस प्रसंग के माध्यम से बिना बुलाए किसी के घर जाने से बचने का संदेश दिया गया। इसके बाद धूमधाम से शिव विवाह संपन्न हुआ।

नारद मोह की लीला में दिखाया गया कि किस प्रकार देवताओं के राजा इंद्र नारद मुनि की कठोर तपस्या से भयभीत हो जाते हैं और उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजते हैं। कामदेव अपने प्रयास में असफल रहते हैं, लेकिन नारद मुनि के मन में अपनी विजय को लेकर अहंकार उत्पन्न हो जाता है।
भगवान शिव उन्हें अहंकार से बचने की सीख देते हैं, लेकिन नारद मुनि उनकी बात अनसुनी कर भगवान विष्णु के समक्ष भी अपनी विजय का वर्णन करते हैं। नारद मुनि का अभिमान दूर करने के लिए भगवान विष्णु एक मायावी नगर की रचना करते हैं, जहां एक राजकुमारी के स्वयंवर में नारद मुनि मोहित हो जाते हैं। स्वयंवर में राजकुमारी द्वारा भगवान विष्णु के गले में वरमाला डालने पर नारद मुनि क्रोधित हो जाते हैं।
इस प्रसंग में नारद मुनि द्वारा भगवान विष्णु को दिए गए श्राप और उसके परिणामस्वरूप त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के जीवन में पत्नी वियोग की कथा का भी वर्णन किया गया। कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को कथा से जोड़ दिया।
रावण के अत्याचारों से त्रस्त पृथ्वी ने लगाई प्रभु से गुहार
इसके बाद रावण द्वारा ऋषि-मुनियों पर किए जा रहे अत्याचारों का मंचन किया गया। रावण के आतंक से परेशान पृथ्वी ने भगवान से प्रार्थना की कि वे स्वयं अवतार लेकर पृथ्वी लोक को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाएं। इस प्रसंग के साथ भगवान श्रीराम के अवतार की पृष्ठभूमि को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
रामलीला मंचन के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद सेवा जगदीश त्यागी की ओर से की गई।
आज होगा श्रीराम जन्मोत्सव का मंचन

श्री रामलीला कमेटी के अनुसार, शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को जिमखाना मैदान में श्रीराम जन्मोत्सव, बाल लीला, ऋषि विश्वामित्र आगमन, सुबाहु वध, मारीच लीला और ताड़का वध का मंचन किया जाएगा।
कार्यक्रम में संस्था अध्यक्ष मनोज गुप्ता (राधा गोविंद मंडप), महामंत्री मनोज अग्रवाल (खद्दर वाले), कोषाध्यक्ष योगेंद्र अग्रवाल (बबलू), राकेश गर्ग, रोहताश प्रजापति, राकेश शर्मा, राजन सिंघल, विपुल सिंघल, मयंक अग्रवाल, संदीप गोयल (रेवड़ी), मयूर अग्रवाल, अपार मेहरा, विपिन अग्रवाल, लोकेश शर्मा, अम्बुज गुप्ता, मनोज दवाई, मनोज वर्मा, पंकज गोयल पार्षद, अनिल वर्मा सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।