पंचदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का हुआ समापन, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापित हुई माता प्रत्यंगिरा निकुंबला देवी की प्रतिमा।
मेरठ। गुप्त नवरात्रि के छठे दिन माता प्रत्यंगिरा निकुंबला देवी के पंचदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य समापन हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत माता की प्रतिमा का नगर भ्रमण कराया गया, जिसके बाद वैदिक विधि-विधान के साथ उन्हें मंदिर में सिंहासन पर विराजमान कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ माता का भव्य स्वागत किया।

आचार्य प्रदीप गोस्वामी ने बताया कि धर्मशास्त्रों के अनुसार माता प्रत्यंगिरा भक्त और भगवान की रक्षा के लिए प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया। बाद में भगवान शिव शरभ (शलभ) स्वरूप में प्रकट हुए, लेकिन दोनों के अत्यंत उग्र स्वरूप को शांत करने के लिए माता प्रत्यंगिरा का प्राकट्य हुआ।
उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता प्रत्यंगिरा को रावण की कुलदेवी भी माना जाता है। कहा जाता है कि रावण और मेघनाथ ने उनकी आराधना कर विशेष वरदान प्राप्त किए थे। इसी कारण मेघनाथ ने इंद्र पर विजय प्राप्त कर 'इंद्रजीत' की उपाधि हासिल की।
आचार्य प्रदीप गोस्वामी ने यह भी बताया कि कर्नाटक में माता प्रत्यंगिरा का प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर स्थित है और इस स्वरूप की प्रतिमा की स्थापना अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है।
मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित जगदीश जोशी ने संपन्न कराई। इस अवसर पर आशा वाधवा, अभिमन्यु वाधवा, अर्जुन वाधवा, तेजस्विनी वाधवा, इंद्रपाल दुबे, कामेश शर्मा, अनुराधा शर्मा, अर्चित मित्तल, हिमांशु वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।