चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ का 38वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में भव्य रूप से आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। इस दौरान विभिन्न संकायों के 199 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक एवं सम्मान प्रदान किए गए।

समारोह में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न भवनों का ऑनलाइन लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। साथ ही 66,971 डिग्रियों को डिजिलॉकर में शामिल करने की घोषणा की। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किट वितरित की और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, अधिकारियों तथा छात्राओं को भी सम्मानित किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि "शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी का विकास करना है।" उन्होंने बताया कि इस वर्ष 75 प्रतिशत से अधिक पदक छात्राओं ने हासिल किए, जो महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।

मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु शुक्ला ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना नई तकनीक, अनुसंधान, कौशल और नवाचार से ही साकार होगा। वहीं उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि डिग्री केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व का संकल्प है।
समारोह में कच्छ की पारंपरिक हस्तकला और महिला सशक्तिकरण में उल्लेखनीय योगदान के लिए रसीलाबेन कांजीभाई डुंगरिया को डी.लिट. (मानद) उपाधि से सम्मानित किया गया।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। समारोह में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।